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Saturday, September 22, 2018

8:55 AM

मेल मर्ज क्या है ?


मेल मर्ज (Mail Merge)सुविधा से हम व्यक्तिगत पत्र, पत्रों के लिए लिफाफे और मेलिंग लिस्ट में लिखे प्रत्येक व्यक्ति के मेलिंग लेबल तैयार कर सकते हैं । कई बार हमें एक जैसे पत्र अनेक नामों और पतों के साथ भेजने होते है । हमारी इस समस्या का समाधान मेल-मर्ज सुविधा में है । मेल-मर्ज सुविधा के प्रयोग से आप अनेक पत्रों को भेज सकते हैं, मेलिंग लेबल बना सकते हैं तथा अलग-अलग नाम तथा पते लिख सकते हैं ।
मेल मर्ज के तीन भाग (Components) होते है :
  1. मुख्य दस्तावेज (Main Document) :
  2. मेल मर्ज में उच्च दस्तावेज ही सार्वजनिक पत्र होता है जिसमें मर्ज को चलाने के लिए निर्देश होते हैं । इसमें सामान्य टेक्स्ट के साथ फील्ड के नाम होते हैं । मुख्य दस्तावेज में सूचनाओं ठीक वैसी ही रहती हैं । वर्ड मर्ज दस्तावेजों में उन विशेष स्थानों, नामों और पतों का प्रवेशन करता है । मर्ज दस्तावेज में शब्दों को डालने से पहले आपको मुख्य दस्तावेज में फील्ड के नामों का प्रवेशन करना चाहिए ।
  3. फील्ड नेम (Field Name) :
  4. फील्ड नेम इस बात की और संकेत करता है कि बदली जाने वाली सूचनाओं का प्रवेशन कहाँ होना है । डाटा सोर्स में, फील्ड के नाम प्रत्येक कॉलम में सूचना के वर्गों की और संकेत करते हैं । इनका मिलान डाटा फाइन में फील्ड नामों के साथ होना चाहिए ।
  5. डाटा स्त्रोत (Data Source) :
  6. डाटा फाइन में वे सूचनाएँ होती हैं जिन्हें मुख्य दस्तावेज में लाना होता है । डाटा सोर्स को डाटा फाइल भी कहते हैं । आप इसमें केवल वाक्यों को ही स्टोर नहीं कर सकते बल्कि कोई भी टेक्स्ट या डाटा, जिसे आप बार-बार प्रयोग करना चाहते हैं, स्टोर कर सकते हैं ।

Friday, September 21, 2018

2:31 AM

E-Commerce क्या है ?


इलेक्ट्रॉनिक कॉमर्स (Electronic Commerce) इंटरनेट जैसे बड़े इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क पर व्यापार करने का एक तरीका है । ई-कॉमर्स के अंतगर्त वस्तुओं या सेवाओं को खरीद या बिक्री इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम जैसे - इंटरनेट के द्वारा होता है । यह इंटरनेट पर व्यापर है । ई-कॉमर्स को व्यापक रूप से इंटरनेट पर उत्पादों की खरीदारी और बिक्री माना जाता है
वर्तमान में ई-कॉमर्स इंटरनेट के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है । ईकॉमर्स उपभोक्ताओं को समय या दूरी की बिना कोई बाधाओं के साथ वस्तुओं और सेवाओं का इलेक्ट्रॉनिक रूप से आदान-प्रदान करने की अनुमति देता है । इंटरनेट पर सामान ख़रीदना और बेचना ईकॉमर्स के सबसे लोकप्रिय उदाहरणों में से एक है।

ईकॉमर्स के उदाहरण :-

  • Online Shopping
  • Electronic Payments
  • Online Auctions
  • Internet Banking
  • Online Ticketing

ई-कॉमर्स के प्रमुख लाभ :-

  • ई-कॉमर्स का उपयोग करते हुए, संगठन न्यूनतम पूंजी निवेश के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपने बाजार का विस्तार कर सकता है ।
  • ई-कॉमर्स कंपनी की ब्रांड छवि को बेहतर बनाता है ।
  • ई-कॉमर्स संगठन को बेहतर ग्राहक सेवाएं प्रदान करने में सहायता करता है ।
  • ई-कॉमर्स व्यापार प्रक्रियाओं को सरल बनाने और उन्हें तेज़ और कुशल बनाने में मदद करता है ।
  • ई-कॉमर्स कागज काम बहुत कम कर देता है ।
  • ई-कॉमर्स ने संगठन की उत्पादकता में वृद्धि की ।
  • ई-कॉमर्स उत्पादों की लागत कम करने में मदद करता है इसलिए कम से कम समृद्ध लोग भी उत्पादों को खरीद सकते हैं ।

ई-कॉमर्स के प्रकार :-

  1. Business to Business E-commerce (B2B E-commerce)
  2. Business to Consumer Ecommerce (B2C Ecommerce)
  3. Consumer to Business Ecommerce (C2B Ecommerce)
  4. Consumer to Consumer Ecommerce (C2C E-commerce)
2:28 AM

Modem क्या है ?


मॉडेम एक उपकरण या प्रोग्राम है जो कंप्यूटर को डेटा को संचारित करने में सक्षम बनाता है उदाहरण के लिए, टेलीफोन या केबल लाइन । यह एक प्रकार का हार्डवेयर डिवाइस है जो एनालॉग और डिजिटल डेटा के बीच वास्तविक समय में दो-तरफा नेटवर्क संचार के लिए परिवर्तित होता है । यह कंप्यूटर या राउटर को ब्रॉडबैंड नेटवर्क से जोड़ता है।
मॉडेम की गति क्या है ?
एक मोडेम की गति बीपीएस (bps) और केबीपीएस( Kbps) में मापा जाता है ।
कंप्यूटर मॉडेम के प्रकार
  • Onboard Modem :
  • Onboard Modem मदरबोर्ड पर निर्मित मॉडेम है, इस मोडेम को हटाया नहीं जा सकता है, लेकिन एक जम्पर (Jumper)या सीएमओएस(CMOS Setup) सेटअप के माध्यम से अक्षम किया जा सकता है ।
  • Internal Modem :
  • मोडेम जो एक पुराने कंप्यूटर पर एक नए डेस्कटॉप कंप्यूटर या ISA स्लॉट के अंदर PCI स्लॉट से कनेक्ट होता है इस दस्तावेज़ की शुरुआत में दिखाए गए आंतरिक मोडेम एक पीसीआई मॉडेम का एक उदाहरण है ।
  • External Modem :
  • एक बॉक्स के भीतर मोडेम जिसे बाहरी रूप से कंप्यूटर से जोड़ता है, आमतौर पर सीरियल पोर्ट या यूएसबी पोर्ट। चित्र बाहरी यूएसआरोबॉटिक्स मोडेम का एक उदाहरण है ।
  • Removable Modem :
  • मोडेम पुराने लैपटॉप PCMCIA स्लॉट के साथ प्रयोग किया जाता है और जरूरत के अनुसार इसे जोड़ा या हटाया जा सकता है ।
एक मॉडेम एक इनपुट और आउटपुट डिवाइस क्यों है ?
एक मोडेम को इनपुट और आउटपुट डिवाइस माना जाता है क्योंकि यह डेटा (अपलोड / आउटपुट) भेजता है और डेटा प्राप्त करता है (डाउनलोड / इनपुट)।

Sunday, August 12, 2018

7:26 AM

लैंग्वेज प्रोसेसर्स क्या है ?


कम्प्यूटर केवल मशीनी भाषा (Machine Language) समझता है जो कि दो अंकों (0 और 1) पर आधारित होती है लेकिन प्रोग्रामर मशीनी भाषा में प्रोग्राम लिखने में असमर्थ होता है । स्त्रोत भाषा में लिखे ये प्रोग्राम कम्प्यूटर के लिए मशीनी भाषा में परिवर्तित किये जाते हैं । ये भाषा प्रोसेसर (Language Processor)उच्च-स्तरीय भाषा को मशीनी भाषा में और मशीनी भाषा को उच्च-स्तरीय भाषा में अनुवाद करते हैं । मशीन भाषा की तुलना में उच्च-स्तरीय भाषा में प्रोग्राम लिखना सरल होता है ।
तीन प्रकार के भाषा प्रोसेसर (Language Processors) हैं :
  1. अनुवादक (Assembler) :
  2. वह प्रोग्राम जो कि असेम्बली भाषा के प्रोग्रामों का अनुवाद मशीनी भाषा में करता है, अनुवादक कहलाता है ।
  3. इन्टरप्रेटर (Interpreter) :
  4. वह प्रोग्राम जो उच्च-स्तरीय भाषा में लिखे प्रोग्राम का अनुवाद मशीनी भाषा में करता है, इन्टरप्रेटर कहलाता है । यह एक के बाद एक लाइन का अनुवाद करता है इसलिए प्रत्येक वाक्य में होने वाली त्रुटियों को मॉनीटर पर एक के बाद एक करके दिखता है । यहाँ पर त्रुटियों को ढूँढना और उन्हें दूर करना बहुत आसान होता है । कई बार तो हम गलती का तभी पता लगा लेते हैं जब हम कम्प्यूटर पर निर्देश टाइप करते हैं ।
  5. कम्पाइलर (Compiler) :
  6. यह उच्च-स्तरीय भाषा को मशीनी भाषा में परिवर्तित करता है । जब प्रोग्राम पूर्ण रूप से कम्प्यूटर में डाल दिया जाता है तब यह पूरे प्रोग्राम को एक ही बार में अनुवाद कर देता है । इससे शीघ्रता से पूरा प्रोग्राम मशीनी भाषा में अनुवादित हो जाता है और यदि इसमें कुछ त्रुटियाँ हैं, वे एक ही समय में स्क्रीन पर प्रकट हो जाती हैं । जब सभी त्रुटियाँ दूर कर दी जाती हैं तो उस प्रोग्राम को फिर से अनुवादित किया जाता है ।

Saturday, August 4, 2018

12:01 PM

सॉफ्टवेयर क्या है ?


सॉफ्टवेयर, प्रोग्रामिंग भाषा द्वारा लिखे गये निर्देशों की श्रृंखला है, जिसके अनुसार दिए गये डेटा का प्रोसेस होता है । बिना सॉफ्टवेयर के कम्प्यूटर कोई भी कार्य नहीं कर सकता है । इसका प्राथमिक उद्देश्य डाटा को सूचना में परिवर्तित करना है । सॉफ्टवेयर के निर्देशों के अनुसार ही हार्डवेयर भी कार्य करता है । इसे प्रोग्राम भी कहते हैं । हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच संचार स्थापित करने को इंटरफेस कहते हैं ।
सभी सॉफ्टवेयर लाइसेंस के माध्यम से संरक्षित तथा प्रतिवेधित रहते हैं । सॉफ्टवेयर लाइसेंस सॉफ्टवेयर के निर्माता तथा उपयोगकर्त्ता के बीच कानूनी एग्रीमेंट है, जिसके अन्तगर्त एक से अधिक कम्प्यूटर पर सॉफ्टवेयर को ईस्टॉल करना, कोड में किसी तरह का रूपान्तरण और सॉफ्टवेयर में किसी तरह का बदलाव करना निषेद्य है । यह सॉफ्टवेयर के उपयोग को प्रतिबंधित करता है ।
कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर विभिन्न तरह के होते हैं । सामान्यतः इसे तीन वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है :
  1. सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
  1. अनुप्रयोग सॉफ्टवेयर (Application Software)
  1. प्रोग्रामिंग सॉफ्टवेयर (Programming Software)

    यह कम्प्यूटर हार्डवेयर को नियंत्रित करता है कि अनुप्रयोग सॉफ्टवेयर अच्छी तरह से चल सके । जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम, डिवाइस ड्राइवर, विंडोज सिस्टम आदि ।
    यह यूजर को एक या एक से अधिक कोई विशेष कार्य पूरा करने की अनुमति देता है । उच्च स्तरीय की कम्प्यूटर भाषाओं का उपयोग कर अनुप्रयोग सॉफ्टवेयर बनाये जाते हैं । सॉफ्टवेयर प्रोग्राम अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हुए लिखा जाता है, अतः यूजर आसानी से कम्प्यूटर का उपयोग कर सकता है । जैसे - वर्ड प्रोसेसर, औद्योगिक स्वचालन, व्यापार सॉफ्टवेयर और चिकित्सा सॉफ्टवेयर आदि ।
    यह आमतौर पर कम्प्यूटर प्रोग्राम लिखने में एक प्रोग्रामर की सहायता करने के लिए उपकरण प्रदान करता है, जैसे - पाठ संपादक, कम्पाइलर, डि-बगर, इन्टरप्रेटर आदि ।

Friday, August 3, 2018

8:49 AM

कम्प्यूटर वायरस क्या है ?


वायरस एक प्रोग्राम है जो हमारे कम्प्यूटर सिस्टम में बिना हमारी इच्छा तथा जानकारी के लोड हो जाता है । एक वायरस बार-बार खुद की प्रतिलिपि तैयार कर सकता है और उपलब्ध सारे मेमोरी का उपयोग कर सिस्टम की गति को धीरे या पूर्णतः रोक सकता है । कुछ वायरस कम्प्यूटर के बूटिंग से स्वंय को जोड़ लेता है तथा जितनी बार कम्प्यूटर बूट करता है वह उतना ही फैलता जाता है या कम्प्यूटर को रिबूट करता करता रहता है । वह कम्प्यूटर के डेटा या प्रोग्राम को क्षति पहुँचाता है । हमारे कम्प्यूटर में वायरस के आने का सामान्य तरीका इंटरनेट तथा अवांछित ई-मेल है ।
कम्प्यूटर वायरस भिन्न-भिन्न प्रकार के होते हैं :
  • बूट सेक्टर वायरस (Boot Sector Virus)
  • परजीवी वायरस (Parasitic Virus)
  • मल्टीपार्टाइट वायरस (Multipartite Virus)
  • लिंक वायरस (Link Virus)
  • मैक्रो वायरस (Macro Virus)
वायरस को नष्ट करने के लिए बनाये गये प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर को एन्टीवायरस कहते हैं । इसमें आटो प्रोटेक्ट तथा रियाल टाइम प्रोटेक्सन की सुविधा रहती है जो इंटरनेट से किसी फाइल का उपयोग करने के पहले उसे जाँच लेता है कि यह वायरस मुक्त है या नहीं । अगर फिर भी वायरस सिस्टम में सक्रिय हो जाता है, तो हमें सूचित कर देता है । जिसे हम एन्टीवायरस के सिस्टम स्कैन चलाकर हटा सकते हैं । कुछ समय के अंतराल पर पूर्ण सिस्टम स्कैन चलाकर हम कम्प्यूटर को वायरस मुक्त रखने में सक्षम हो सकते हैं । सर्वप्रथम दिखनेवाला पर्सनल कम्प्यूटर वायरस सी-ब्रेन है ।
कुछ कम्प्यूटर वाइरस निम्नलिखित है :
  • सी-ब्रेन (C-Brain)
  • मंकी (Monkey)
  • वान हॉफ (Vanhalf)
  • माइकल एंगेलो (Michelangelo)
  • क्रिपर (Creeper)
  • हैप्पी वर्थडे जोशी (Happy Birthday Joshi)

Tuesday, July 31, 2018

10:24 AM

डॉस (DOS) क्या है ?


डॉस (DOS) एक ऑपरेटिंग सिस्टम है । किसी कम्प्यूटर सिस्टम के सरल कार्यों को करने के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण सॉफ्टवेयर है । इसका पूरा नाम डिस्क ऑपरेटिंग सिस्टम (Disk Operating System) है । यह ऑपरेटिंग सिस्टम उपभोक्त्ता और कम्प्यूटर सिस्टम के बीच माध्यम का काम करता है ।
इस ऑपरेटिंग सिस्टम के जरिये कम्प्यूटर को चलाने से पहले ऑपरेटिंग सिस्टम को मेमोरी में लोड करना आवश्यक है । डॉस हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच एक माध्यम का कार्य करता है । यह उन कमाण्डों को परिवर्तित करता है जो की-बोर्ड की मदद से ऐसी भाषा डाली जाती हैं जिन्हें कम्प्यूटर आसानी से समझ सके । इसे डिस्क पर स्टोर किया जाता है और यह आपकी हार्ड डिस्क से में मेमोरी में लोड किया जाता है ।
आप विशेष कमाण्डों के प्रयोग से निम्नलिखित कार्यों को कर सकते हैं :

  • फाइल को बनाना या मिटाना और फाइल के नामों को बदलना ।
  • आप स्टोर की गई फाइलों की सूचि देख सकते हैं ।
  • आप हार्डवेयर को दो भागों में बाँट सकते हो ।
  • नई फ्लॉपी डिस्क को फॉरमेट कर सकते हो ।
  • आप हार्ड डिस्क से फ्लॉपी में और फ्लॉपी डिस्क से हार्ड डिस्क में बैकअप ले सकते हैं ।
  • यह हार्डवेयर जैसे की सी. पी. यू. और मेमोरी को नियंत्रण करता है ।
  • यह वायरस को ढूँढ निकालता है ।
  • यह विभिन्न प्रोग्रोमों में मेमोरी का आबंटन करता है ।
  • यह कम्प्यूटर से जुड़े अन्य उपकरणों को नियंत्रित करता है ।
  • यह की-बोर्ड से सूचनाओं को लेता है और उन्हें मॉनीटर पर दिखाता है ।

Monday, July 30, 2018

6:49 PM

नेटवर्क टोपोलॉजी क्या है ?


नेटवर्क टोपोलॉजी विभिन्न नोड्स या टर्मिनल को आपस में जोड़ने का तरीका है । यह विभिन्न नोड्स के बीच भौतिक संरचना को दर्शाता है । नेटवर्क संरचना का अर्थ है कि नेटवर्क तारों की तर्कपूर्ण व्यवस्था । अन्य शब्दों में, कम्प्यूटरों का आपस में जुड़ने का ढंग ही नेटवर्क टोपोलॉजी कहलाता है ।
नेटवर्क टोपोलॉजी निम्नलिखित प्रकार के होते हैं :
  • मेस टोपोलॉजी (Mesh Topology) :
  • यह नेटवर्क उच्च ट्राफीक स्थिति में मार्ग (Routes) को ध्यान में रखकर उपयोग किया जाता है । इसमें किसी भी स्त्रोत (Source) से कई मार्गों से सन्देश भेजा जा सकता है । पूर्णतः इन्टरकनेक्टेड मेस नेटवर्क खर्चीला है, क्योंकि इसमें ज्यादा केबल (Cable) तथा नोड में इंटेलिजेंस की आवश्यकता होती है । इस नेटवर्क में उच्च सुरक्षा अनुप्रयोग में डाटा प्रेषित किया जाता है ।
  • स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) :
  • इस नेटवर्क में एक केन्द्रीय नोड होता है जो इंटेलिजेंस से युक्त होता है । बाकि नोड्स इससे जुड़े रहते हैं । इस केन्द्रीय नोड को हब कहते हैं । कोई एक केबल में कोई कठिनाई आने पर एक ही नोड विफल होता है परन्तु अगर हब में कोई कठिनाई आती है तो सारा नेटवर्क विफल होता है ।
  • रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) :
  • इस नेटवर्क में सभी नोड्स में समान रूप से इंटेलिजेंस होता है । डेटा का प्रवाह हमेशा एक ही दिशा में होता है परन्तु किसी भी एक केबल या नोड में कठिनाई आने पर दूसरे से संचार संभव है ।
  • बस टोपोलॉजी (Bus Topology) :
  • इस नेटवर्क में सभी नोड्स एक ही केवल में जुड़े रहते हैं । कोई भी नोड किसी दूसरे नोड को डेटा प्रेषित करना चाहता है तो उसे देखना होता है की बस में कोई डेटा प्रवाहित तो नहीं हो रहा है । बस खाली रहने पर नोड डेटा प्रेषित कर सकता है । इसमें कम केबल की आवश्यकता होती है तथा नया नोड जोड़ना आसान होता है । परन्तु प्रमुख ट्रांसमिशन लाइन में कठिनाई आने पर सारा नेटवर्क विफल हो जाता है ।
6:37 PM

TCP/IP क्या है ?


टी सी पी (TCP) का अर्थ है ट्रान्समिशन कन्ट्रोल प्रोटोकॉल (Transmission Control Protocol) और आई पी (IP) का अर्थ इन्टरनेट प्रोटोकॉल (Internet Protocol)
यह नियमों का एक समूह है, जो इंटरनेट कैसे कार्य करता है यह निर्णय करता है । यह दो कम्प्यूटर के बीच सूचना स्थान्तरण और संचार को संभव करता है । इनका प्रयोग डाटा को सुरक्षित ढंग से भेजने के लिए किया जाता है । टी सी पी की भूमिका डाटा को छोटे-छोटे भागों में बाँटने की होती है और आई पी इन पैकिटों पर लक्ष्य स्थल का पता अंकित करता है ।